Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
दूरं निकटवद्भाति मुकुरेऽन्तरिवाचलः ।
चिरं शीघ्रत्वमायाति पुनः श्रेष्ठेव यामिनी ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दर्पण के भीतर स्थित पर्वत दूर
होता हुआ भी निकट प्रतीत होता है वैसे ही अत्यन्त दूर की वस्तु भी निकट की तरह प्रतीत
होती है । सुख की नींद से बीती हुई रात्रि के तुल्य दीर्घकाल भी शीघ्रता को प्राप्त हो जाता
है