Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
स तत्र विहरंस्तांस्तान्वृत्तान्तान्सकलानथ ।
दृष्टवान्पृष्टवांश्चैव ज्ञातवांश्च विसिस्मिये ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर विचर रहे राजा ने पहले अनुभूत वे सब वृत्तान्त देखे,
पूछे और पहचाने एवं राजा के आश्चर्य की सीमा न रही