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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

एवं लपन्तीं स्वकलत्रवृद्धां दासीभिराश्वास्य नृपः स्त्रियं ताम् । पप्रच्छ किंवृत्तमिहैव का च का ते सुता कश्च सुतस्तवेति ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार विलाप कर रही तथा चण्डालता को प्राप्त हुए अपने पोषणीय लोगों में सबसे बड़ी-बूढ़ी उस स्त्री को दासियों द्वारा समझा बुझाकर राजा ने उससे पूछा : यहाँ पर क्या घटना घटी हे, तुम कौन हो, तुम्हारी लड़की कौन हे ओर कौन तुम्हारा लड़का हे ?