Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
हा पुत्रि पुत्रावृतसर्वगात्रे दिनत्रयाभोजनजर्जराङ्गि ।
कृत्वासिना वर्मणि जीर्णदेहाः कथं क्व मुक्ता भवतासवस्ते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पुत्रि, तुम्हारा सारा वदन पुत्रों से ढका होगा, तीन दिन तक भोजन न
मिलने के कारण तुम्हारा शरीर जर्जर हो गया होगा, जैसे तलवार अपने कोश में प्रवेश करके
स्थित हो जाती है, वैसे ही अपने कोश में स्थित हुए राजा ने प्राण के समान प्रिय तुम लोगों को,
जिनके किं शरीर दुर्भिक्ष से जर्जर हो गये थे, कैसे ओर कहाँ छोड़ा ?