Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तत्रापश्यज्जनांस्तांस्तांस्ताः स्त्रियस्ताः कुटीरकाः ।
नानाकाराञ्जनाधारांस्तांस्तांश्च वसुधातटान् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर उसने पहले से परिचित
उन उन पुरुषों के, पूर्वदृष्ट उन स्त्रियो को पहले अनुभूत उन छोटी-छोटी झोंपड़ियों को और
उन उन भूमितटों को देखा, जिनका आकार-प्रकार भाँति-भाँति का था और जिनमें अनेक
लोग निवास करते थे