Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
ये तु मोहात्समुत्तीर्णा न प्राप्ताः पावनं पदम् ।
आस्थिता भूमिकास्वासु स्वात्मलाभपरायणाः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो लोग यद्यपि
दूसरी-तीसरी भूमिकाओं में या चौथी भूमिका में ज्ञान का उदय होने से आवरण का नाश होने
पर मोह से भलीभाँति पार हो गये, तथापि प्रबल प्रारब्धप्रयुक्त विक्षेप के कारण परमपावन पद
को प्राप्त नहीं हुए यानी आत्यन्तिक मोहनाश से उपलक्षित, निरतिशयानन्द, पूर्णरूप, विदेह
कैवल्य को प्राप्त नहीं हुए, आत्मप्राप्ति में संलग्न वे लोग इन भूमिकाओं में स्थित हैं