Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्ता न सज्जन्ति सुखदुःखरसस्थितौ ।
प्रकृतेनार्थकार्याणि किंचित्कुर्वन्ति वा न वा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्त पुरुष सुख-दुःख में निमग्न नहीं होते । केवल देहयात्राके लिए छठी ओर सातवीं
भूमिकाओं में कुछ कार्य करते भी हैं अथवा नहीं भी करते