Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verses 6–7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, verses 6–7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 6, 7
संस्कृत श्लोक
अतः शक्रेण गगनाद्दुःखाय लवणस्य सः ।
प्रहितो देवदूतो हि राम शाम्बरिकाकृतिः ॥ ६ ॥
राजसूयक्रियाकर्तुस्तस्य दत्त्वा महापदम् ।
अगच्छत्स नभोमार्गं सुरसिद्धनिषेवितम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इसलिए इन्द्र ने राजा लवण के दुःख के लिए ऐन्द्रजालिक का वेष
धारण किये हुए देवदूत को आकाश से भेजा । राजसूययज्ञ करनेवाले उस राजा लवण को
महाक्लेश देकर वह देवता ओर सिद्धो से सेवित आकाश मार्ग में चला गया