Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
यदा शाम्बरिकः काले संप्राप्तो लावणीं सभाम् ।
तदाहमवसं तत्र तत्प्रत्यक्षेण दृष्टवान् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि अन्य लोगों के लिए उसमें प्रमाण का अवसर नहीं है तथापि योगबल से मुझे वह
प्रत्यक्ष है । इसलिए मेरे प्रत्यक्ष से ही और लोगों में भी उसकी प्रसिद्धि है ऐसा वसिष्ठजी
समाधान करते हैं।
श्री वसिष्ठजी ने कहा : जब एेन्द्रजालिक राजा लवण की सभा में आया, उस समय मैं वहाँ
पर विद्यमान था । यह सब कुछ मैंने प्रत्यक्ष देखा