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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अन्यो यत्संशयोऽयं मे महात्मन्हृदि वर्तते । लवणोऽसौ महाभागः किं नामापदमाप्तवान् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महात्मन्‌, और दूसरा यह सन्देह, जो मेरे हृदय में बैठा है, वह यह है कि वह महाभाग राजा लवण किस प्रकार आपत्ति को प्राप्त हुए ?