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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 53

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

मम पुत्रा मम धनमयं सोऽहमिदं मम । इतीयमिन्द्रजालेन वासनैव विवल्गति ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

ये मेरे पुत्र हैं, मेरा धन है, यह मैं हूँ, यह मेरा घर है, इस प्रकार के इन्द्रजाल से यह वासना ही वृद्धि को प्राप्त होती है