Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
पदार्थरथमारूढा भावनैषा बलान्विता ।
आक्रामति मनः क्षिप्रं विहगं वागुरा यथा ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयरूप
रथ पर बैठी हुई यानी विषयाकार बनी हुई उद्भूतवासनारूप महाबलवती यह अविद्या, जैसे
जाल पक्षियों पर आक्रमण करता है, वैसे ही शीघ्र मन पर आक्रमण करती है यानी मनको मोह
में डालकर बाँधती है