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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

इतो याति परं लोकं स्फुरत्यन्यतया मनः । तत्तस्यैत्येतदामोक्षमतो मृतिभयं कुतः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस लोक से मन परलोक में जाता है ओर वहाँ अन्यरूप से स्फुरित होता हे । वे मरण ओर परलोकगमन जब तक मोक्ष नहीं होता तब तक मन को प्राप्त होते हैं, इसलिए पुरुष को मरण का भय कैसे ?