Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मनोमारणमात्रेण साध्येन स्वात्मसंविदा ।
निःसपत्नमनाद्यन्तमनिङ्गनमिहोच्यताम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र मन के मारण से प्राप्त होने वाले आत्मतत्त्व - साक्षात्कार
से स्वराज्य सुख के विरोधी मोह आदि शत्रुओं से रहित अतएव अचल अनादि अनन्त स्वराज्य
की इसी जीवन्मुक्त देह में आप निःशंक होकर प्रतिज्ञा कीजिये