Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
नयत्यभ्याशतां दूरं दूरमभ्याशतां नयेत् ।
मनो वल्गति भूतेषु बालो बालखगेष्विव ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ की संभावना से मनकी अघटित घटना शक्ति को कहते हैं।
मन दूर को समीप बना देता है और समीप को दूर कर देता हे । जैसे छोटा बच्चा चिड़ियों
के बच्चों में अपना पराक्रम दिखाता हे वैसे ही मन प्राणियों में अपना प्रभाव दिखाता हे