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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

अतस्त्वं मन एवेदं नरं विद्धि न देहकम् । जडो देहो मनश्चात्र न जडं नाजडं विदुः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

पहले मन ही मेरी देह है अन्य देह नहीं है, ऐसा सदा अभ्यास करना चाहिए, ऐसा कहते हैं । इसलिए तुम नर को मन ही समझो, देह न समझो । देह जड है । मन को न लोग जड़ कहते है ओर न अजड कहते हैं