Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 108 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
दग्धाजगरकुञ्जोत्थधूममांसलगुल्मकम् ।
मारुतावलितज्वालासंध्याभ्रवलिताम्बरम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन झाड़ियों में वनाग्नि से अजगर जल गये थे, उनसे उठे हुए धुएँ से, जो
उनके अधिक फलने-फूलने के लिए दी गई धूप के तुल्य प्रतीत होता था, सब पेड ओर
झाड़ियाँ हृष्टपुष्ट हो गई थी । वायु के ओके से परिवेष्टित वनाग्नि की ज्वालाओं से
सन्ध्याकालीन मेघ के तुल्य सारा आकाश आच्छन्न था