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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 108 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

दरीनिगरणैकैकसिंहभ्रमणभीषणम् । अन्योन्यग्रसनोद्युक्तलोकमल्लकृतं वहत् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

गुफाओं में हमें कोई निगल न जाय इस आशंका से एक-एक करके घूम रहे सिंहो से उसकी भीषणता कहीं अधिक बढ़ गई ओ । परस्पर एक दूसरे को मारने लिये उद्यत हुए लोगों के मल्ल चरित्र को वह धारण करता था