Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
कोऽयं प्रदेशः कस्येयं सभेति स नृपः शनैः ।
दध्वान मज्जदम्भोजकोशस्थ इव षट्पदः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे डूब रहे कमल के कोश के अन्दर स्थित भ्रमर मन्द-मन्द ध्वनि
करता है वैसे ही उस राजा ने यह कौन प्रदेश है ओर यह किसकी सभा है ? यों धीरे-धीरे
कहा