Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
पुरोगैर्धार्यमाणोऽसौ पर्याकुलमतिर्नृपः ।
वीचिविक्षोभितस्येन्दोर्बभार वनमाः श्रियः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
मन्त्री आदि सन्मुखवर्ती पुरूषों द्वारा
सम्हाले जा रहे व्याकुलबुद्धि उस राजा ने चन्द्रमा का उदय होने पर उछल रहे समुद्र के जल
की शोभा धारण की