Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वोन्मुखनेत्रेषु सभ्येषु स हसन्निव ।
राजा वर्णयितुं चित्रं वृत्तान्तमुपचक्रमे ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कहकर जब सब
(तित पहले किसी समय बलि ने इन्द्र को असहाय अवस्था मेँ पा लिया । वह अपने बल से इन्द्र
सभासद राजा की ओर टकटकी लगाकर देख रहे थे तब मुस्कुराते हुए राजा ने विचित्र वृत्तान्त
कहना आरम्भ किया