Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सततोदारवृत्तासु कथासु परिशीतलम् ।
मनस्ते निर्मलं कस्मात्संभ्रमेषु निमज्जति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उदार वृत्तान्तवाली विद्वत्चर्चाओं के विषय में परिशीलन करने से शीतल अतएव
निर्मल आपका मन भयो में क्यों निमग्न हो रहा है २।