Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
स्वप्नेष्वपि न सामान्या यस्योदारचमत्कृतिः ।
राम दृष्टा श्रुता वापि दैन्यदोषमयी क्रिया ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रामचन्द्रजी, जिसका उदार चमत्कार अन्य
राजाओं के तुल्य नहीं था यानी उनसे कहीं अधिक बढा-चढा था, जिसकी दीनतारूपी दोष
से युक्त क्रिया न तो स्वप्न में भी देखी गई थी ओर न सुनी गई थी