Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
कृपाणशकलोत्कृत्तनिःशेषारातिमण्डलः ।
अरातिलोकः प्राप्नोति यदनुस्मरणाज्ज्वरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके प्रधान प्रधान शत्रुजन
तलवारों से टुकड़े-टुकड़े करके काटे गये अतएव निःशेष हो गये थे । उसके शत्रुओं के सेवकों
को उसके स्मरण से ही ज्वर हो आता था