Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verses 12–13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 12 , 13
संस्कृत श्लोक
तत्रास्ति लवणो नाम राजा परमधार्मिकः ।
हरिश्चन्द्रकुलोद्भूतो भूमाविव दिवाकरः ॥ १२ ॥
यद्यशःकुसुमोत्तंसपाण्डुरस्कन्धमण्डलाः ।
तत्र शैला विराजन्ते हाराः प्रोद्धूलिता इव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त उत्तरापाण्डवनामक देश में हरिश्चन्द्र कुल में
उत्पन्न हुआ परमधार्मिक लवण नामक राजा था । वह भूमि में सूर्य के सदृूश तेजस्वी था ।
जिसके यशरूपी फूलों की शिरोमालाओं से शुभ्र मध्यभागवाले शैल विभूति से विभूषित भगवान्
शंकरजी के वृषभ आदि के समान सुशोभित हो रहे थे