Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विशीर्णेऽभ्रे यथा वातः शुष्केऽब्जे षट्पदो यथा ।
यात्यनन्तपदं व्योम तथात्मा देहसंक्षये ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
मेघ के छिन्न-भिन्न होने पर वायु तथा कमल के सूखने पर भँवर विस्तीर्ण आकाश में चला
जाता है वैसे ही देह का क्षय होने पर आत्मा असीम आकाश में चला जाता है