Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, Verses 31–33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, verses 31–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 101 · श्लोक 31,32
संस्कृत श्लोक
एषा हि कथिता राम चित्ताख्यानकथां प्रति ।
बालकाख्यायिका तुभ्यं मया कमललोचन ॥ ३१ ॥
इयं संसाररचना स्थितिमेवमुपागता ।
बालकाख्यायिकेवोग्रैः संकल्पैर्दृढकल्पितैः ॥ ३२ ॥
विकल्पजालकैवेयं प्रतिभासात्मिकानघ ।
बन्धमोक्षादिकलनारूपेण परिजृम्भते ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे कमलनयन श्रीरामचन्द्रजी, मैंने आपके लिए यह बालकाख्यायिका चित्ताख्यान
के अनन्तर प्रवृत हुई जो जगत्प्रतीति ही विकल्पमात्रत्व कथा है, उसके उदाहरण रूप से
कही है । विकल्पमात्ररूप यह संसार रचना बालकाख्यायिका के समान दृढ़तापूर्वक कल्पित
उग्र संकल्पों से दृढता को प्राप्त हुई है, वस्तुतः यह कुछ नहीं है