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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

मोहार्थशब्दार्थदृशोरेतयोरत्यसंभवात् । सत्यत्वादात्मनश्चैव क्वात्मा बद्धः क्व मुच्यते ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

व्यामोहजनित बन्ध-मोक्षशब्दार्थदृष्टियों का आत्मा में अत्यन्त असम्भव है, तथा आत्मा सत्य है, इस कारण कहाँ आत्मा बद्ध होता है ओर कहाँ मुक्त होता है यानी आत्मा के बन्ध और मोक्ष की कल्पना अज्ञान स्फुरित है