Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
यथा यथास्य मनसः प्रतिभासः प्रवर्तते ।
तथा तथैव भवति दृष्टान्तोऽत्र किलैन्दवाः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस मनका जेसा-जैसा प्रतिभास होता है वैसा-
वैसा ही यह हो जाता है, इसमें एेन्दव (& ) ब्राह्मण दृष्टान्त हैं