Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यथा दधाति पुष्पाणि तथा चित्तानि लोककृत् ।
क्वचित्क्वचित्कदाचिद्धि तस्मादायान्ति शक्तयः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे देश, काल आदि की विलक्षणतासे पृथ्वीतल
से धान आदि के पौधे उगते हैं वैसे ही ब्रह्म से भी कहीं-कहीं पर कभी ही उक्त चित्तशक्तियाँ
व्यवस्थासे आविर्भूत होती हैं