Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 1, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 1, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ततः स्तिमितगम्भीरं न तेजो न तमस्ततम् ।
अनाख्यमनभिव्यक्तं सत्किंचिदवशिष्यते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त अमूर्तं होने से क्रियारहित परिच्छेद
(माप) से शून्य होने से अथाह (असीम), निर्धर्मिक (धर्मरहित) होने से संज्ञारहित और
अज्ञानसे आवृत्त होने से अभिव्यक्ति से शून्य अथवा प्रपंच के संस्कार का आधार होने से
अभिव्यक्ति से रहित केवल सत् नामक ही कोई वस्तु शेष रहती है, वह रूपरहित होनेसे न तो
तेज है ओर न प्रकाशरूप होने से तम ही है