Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
समता सांत्वनेनाशु न द्रागिति शनेशनेः ।
पौरुषेणैव यत्नेन पालयेच्चित्तबालकम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार पूर्वोक्त क्रम से चित्तरूपी बालक को शीघ्र
रागादि दोषों के विश्लेषण से और स्वाभाविक समता में स्थापन से निर्दोष बनाकर धीरे-धीरे
आत्मस्वरूप में निरोधरूप पौरूषप्रयत्न से लगावे