Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
अथ चेदशुभो भावस्त्वां योजयति संकटे ।
प्राक्तनस्तदसौ यत्नाज्जेतव्यो भवता बलात् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरे पक्ष में कहते हैं ।
यदि आपकी पूर्वजन्म की वासनाएँ अशुभ हैं और वे आपको संकट की ओर ले जाती हैं,
तो उन प्राक्तन अशुभ वासनाओं पर आपको प्रयत्नपूर्वक दढता से विजय प्राप्त करनी चाहिए ।
भाव यह कि वासनाओं का उद्बोध स्वतन्त्ररूप से नहीं होता, किन्तु किसी उद्बोधक के
अनुसार ही होता है । यदि असज्जन की संगति आदि से कदाचित् एक आध अशुभ वासना
उठे, तो उसका, उसके विरोधी साधु संगति, सत्-शास्त्र के अभ्यास आदि से विरोधी शुभ
वासना की उत्पत्ति कराकर, तिरस्कार कर देना चाहिए