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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 2, Verses 19–20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 2, verses 19–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 19,20

संस्कृत श्लोक

कदर्थना च नैवैषा रामो हि गतकल्पषः । निर्मले मुकुरे वक्त्रमयत्नेनैव बिम्बति ॥ १९ ॥ तज्ज्ञानं स च शास्त्रार्थस्त्वद्वैदग्ध्यमनिन्दितम् । सच्छिष्याय विरक्ताय साधो यदुपदिश्यते ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

अल्पफल देनेवाला महान्‌ परिश्रम नहीं है। श्रीरामचन्द्रजी निष्पाप हैं, अत: जैसे निर्मल दर्पण में प्रयत्न के बिना ही मुंह प्रतिबिम्बित हो जाता है, वैसे ही श्रीरामचन्द्रजी को प्रयत्न के बिना तत्त्वबोध प्राप्त हो जायेगा। सज्जनशिरोमणे, वही ज्ञान है, वही शास्त्रार्थ हे ओर वही प्रशंसनीय पाण्डित्य है, जिसका कि विरक्त सत्‌शिष्य के लिए उपदेश दिया जाता है