Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अकारणैः कारणिभिर्बोधार्थमुपमीयते ।
उपमानैस्तूपमेयैः सदृशैरेकदेशतः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
“ओषधं पिब भ्रातुरिव ते शिखा वर्धिष्ति (ओषधि पीओ, भाई के समान तुम्हारी भी शिखा
बढ़ जायेगी) इस प्रकार बालक की औषधि पीने में प्रवृत्ति के कारण और शिखा की वृद्धि में
अकारण, इष्ट साधन होने से, एक अंशमें सदुश उपमान और उपमेयों से बालक को औषधिपान
में इष्टसाधनताज्ञान के (औषधि पीने से मेरा हित होगा इत्याकारक ज्ञान के) लिए जैसे लोक
में उपमा दी जाती है, वैसे ही एक अंश से सदुश अपरिणामी ओर परिणामी उपमान और
उपमेयों से ज्ञातव्य सत् पदार्थ के बोध के लिए उपमा दी जाती है