Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
कारणं त्वविचारोत्थजीवस्यासदपि स्थितम् ।
सदिवास्यां जगद्रूपं प्रकृतौ व्यक्तिमागतम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि एक ही में वास्तविकरूप से कार्यत्व ओर कारणत्व
नहीं बन सकते तथापि साक्षी चेतन में कारणता अविचार (अज्ञान) जनित होने से सत् नहीं
है, फिर भी जीव को सत् सी प्रतीत होती है इस अज्ञानसंवलित आत्मरूप प्रकृति में जगत्
अभिव्यक्त (प्रकट) हुआ है, इस प्रकार यह जगत् आरोपित है, यह भाव है