Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
यो यो नामेह दृष्टान्तो ब्रह्मतत्त्वावबोधने ।
दीयते स स बोद्धव्यः स्वप्नजातो जगद्गतः ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
दृष्टान्त का एक देश में ही ग्रहण क्यो होता है ? ऐसी कोड शंका न कर बैठे, इसलिए
सवशि में सादृश्य की प्रसिदि ही नहीं है, इस अभिप्राय से कहते है ।
यहाँ ब्रह्मतत्त्व के ज्ञापन में जो-जो दृष्टान्त दिया जाता है वह स्वप्न में प्रतीत पदार्थ की
नाई मिथ्याभूत जगत् के अन्तर्गत ही है वास्तविक नहीं हे, क्योकि दूसरी परमार्थसत्य और
चिदानन्दस्वरूप वस्तु हे ही नहीं, यह आशय हे