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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 14, Verse 54

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 14, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

सफलता फलते भुवि कर्मणां प्रकटतां किल गच्छति उत्तमाम् । स्फुटविचारदृशैव विचारिता शमवते भवते च विरोचताम् ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

विस्तारपूर्वक कटे गये विचार का ही संक्षेपतः उपसंहार करते है - श्रीरामजी, अतः पृथिवी में सभी लोग स्फुट विचारदुष्टि से ही वैदिक ओर लौकिक कर्मो में सफलता प्राप्त करते हैं, आत्मतत्त्व की आगे कही जानेवाली सप्तम भूमिकारूप उत्तम प्रकटता भी विचार से ही प्राप्त करते हैं, इसलिए शम, दम आदि साधनसम्पत्ति से युक्त आपको उक्त विचारशीलता रूचिकर हो