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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 12, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 12, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

ये केचन समारम्भा याश्च काश्चन दृष्टयः । ते च ताश्च पदे दृष्टे निःशेषे यान्ति वै शमम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस कथा श्रवणरूप कार्य की अवधि कौन है ? ऐसी आशंका होने पर परम पदसाक्षात्काररूप विश्रान्ति ही उसकी विश्रान्ति है, इस अभिप्राय से कहते हैं । जो कोई कार्य हैं और जो कोई प्रमाण, प्रमेय आदि व्यवहार हैं, वे सब कार्य ओर वे सब व्यवहार परब्रह्म परमात्मा के दर्शन होने पर सर्वथा शान्त हो जाते हैं