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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verses 49–50

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, verses 49–50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 49,50

संस्कृत श्लोक

साक्षादिव ब्रह्मणो मे तवाभ्यागमनं मतम् । पूतोऽस्म्यनुगृहीतश्च तवाभ्यागमनान्मुने ॥ ४९ ॥ त्वदागमनपुण्येन साधो यदनुरञ्जितम् । अद्य मे सफलं जन्म जीवितं तत्सुजीवितम् ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

मुने, मुझे प्रतीत हो रहा हे कि आपका शुभागमन साक्षात्‌ ब्रह्म का शुभागमन है आपके आगमन से उत्पन्न पुण्य से मैं पवित्र हुआ हूँ, यश ओर अभ्युदय से अनुगृहित हू । आज आपके आगमन से उत्पन्न पुण्य से अनुरंजित मेरा जन्म सफल हो गया है और मेरा जीवन सार्थक हो गया हे