Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 4, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 4, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्गृहे दाशरथेः प्रियप्रकथनैर्मिथः । जुघूर्णुर्मधुरैराशा मृदुवंशस्तनैरिव ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज दशरथ के घर में श्रीरामचन्द्रजी के बाँसुरी की कोमल ध्वनि के समान मधुर प्रियवचनों से आह्वादित हुए लोग परस्पर दिशा-दिशा में घूमने लगे । या हर्ष से उत्पन्न व्यामोह से उन्हें दिग्भ्रम हो गया, यह अर्थ है