Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 4, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 4, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
सुहृद्भिर्भ्रातृभिश्चैव पित्रा द्विजगणेन च ।
मुहुरालिङ्गिताचारो राघवो न ममौ मुदा ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
मित्रों ने भाइयों ने, पिता ने और ब्राह्मणों ने
श्रीरामचन्द्रजी को बार बार आलिंगन किया । आलिंगन करनेवालों के प्रति यथायोग्य अभिवादन,
प्रिय भाषण आदि सुन्दर व्यवहार करनेवाले श्रीरामचन्द्रजी हर्ष से फूले नहीं समाते थे