Guru's AddaGuru's Adda

Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 33

बत्तीसवाँ सर्ग समाप्त तैंतीसवाँ सर्ग सभा में सिद्ध पुरुषों का शुभागमन और अपनी अपनी योग्यता के अनुकूल स्थान में बैठे हुए सिद्धों द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के वचनों की प्रशंसा ।

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  1. Verses 1–2सिद्धो द्वारा की गई श्रीरामचन्द्रजी के वचनो की श्लाघा को ही विश्कलित कर रहे महामुनि वाल्म…
  2. Verse 3कल्याणकारी कार्यो में बहुत विघ्न उपस्थित हो जाते हैं, इसलिए विलम्ब करना उचित नहीं है, यह…
  3. Verses 4–5श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : सिद्धों के यों कहनेपर विमानों पर रहनेवाले सम्पूर्ण दिव्य मुनिजन उ…
  4. Verses 6–45बढ़ानेवाली मुनिमण्डली मुक्तावली के समान दिखाई दे रही थी, वह मुनिमण्डली क्या थी मानों दूसर…
  5. Verse 46श्रीरामचन्द्रजी के मनोरथ की पूर्ति अवश्य करनी चाहिए, इस बात को उनकी प्रशंसारूप उत्तम अधिक…