Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 31, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 31, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यस्मात्किल जगत्यस्मिन्व्यवहारक्रिया विना ।
न स्थितिः संभवत्यब्धौ पतितस्याजला यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि व्यवहार से दुःख होता है तो व्यवहार का त्यागकर दीजिए ऐसी शंका होने पर कहते हैँ ।
जैसे सागर में उत्पन्न हुए मछली आदि जलजन्तुओंं के प्राण जल के बिना नहीं रह सकते हैं, वैसे
ही व्यवहारो के सम्पादन के बिना इस संसार में स्थिति नहीं हो सकती