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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verses 29–30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, verses 29–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

ग्रामीणललनालोलहस्तपद्मापनोदितैः । लाजवर्षैर्विकीर्णात्मा हिमैरिव हिमाचलः ॥ २९ ॥ आवर्जयन्विप्रगणान्परिशृण्वन्प्रजाशिषः । आलोकयन्दिगन्तांश्च परिचक्राम जाङ्गलान् ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बर्फ की झड़ियों से हिमालय आच्छादित हो जाता है वैसे ही ग्रामीण महिलाओं के चंचल हाथों से बरसाई गई लाजा (धान आदि) की वृष्टि से उनका शरीर व्याप्त हो गया