Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अयं वासनया देहो ध्रियते भूतपञ्जरः ।
तनुनान्तर्निविष्टेन मुक्तौघस्तन्तुना यथा ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
मन के नष्ट होने पर भी स्थूल देहरूप बन्ध बना ही रहेगा ?
जैसे पिरोये हुए सूक्ष्म सूत्र से (धागे से) मोतियों का समूह स्थित रहता है वैसे ही पंचमहाभूतों से
बना हुआ यह शरीर वासना से खड़ा हे