Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
यामिनीपङ्ककलितां दिनकोकनदावलीम् ।
मेघभ्रमरिकामात्मसरस्यारोपयन्स्थितः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह काल लगातार रात्रिरूपी पंक से उत्पन्न
हुई ओर मेघरूपी भंवरी से युक्त दिनरूपी लाल कमलो की श्रेणी का अपने आत्मरूपी तालाब में रोपण
करता रहता हे