Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
दासाः पुत्राः स्त्रियश्चैव बान्धवाः सुहृदस्तथा ।
हसन्त्युन्मत्तकमिव नरं वार्धककम्पितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
नौकर-चाकर, पुत्र, स्त्रियाँ, बन्धु-बान्धव और सगे-सम्बन्धी सभी लोग वृद्धावस्था से
काँप रहे मनुष्य का घृणित उन्मत्त पुरुष की नाई उपहास करते हैं