Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
जराचन्द्रोदयसिते शरीरनगरे स्थिते ।
क्षणाद्विकासमायाति मुने मरणकैरवम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनीश्वर, वृद्धावस्थारूपी चन्द्रोदय से शुभ
(सफेद ओर प्रकाशमय) शरीररूपी नगर में स्थित जीविताशारूप तालाब में मृत्युरूपी कुमुदिनी क्षणभर
में विकास को प्राप्त होती है अर्थात् जैसे चन्द्रमा के उदित होने से प्रकाशमय नगर में स्थित तालाब में
कुमुदिनी शीघ्र विकसित हो जाती है, वैसे ही वृद्धावस्था से सफेद हुए शरीर में स्थित जीविताशा में
शीघ्र मृत्यु का आविर्भाव हो जाता है