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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

हार्दान्धकारकारिण्या भैरवाकारवानपि । यौवनाज्ञानयामिन्या बिभेति भगवानपि ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

हृदय में अन्धकार करनेवाली यौवनयुक्त अज्ञान-रात्रि से विशाल आकारवाले भगवान्‌ महादेवजी भी निश्चय भयभीत रहते हैं, इसीलिए ही वे सदा विवेक ज्ञान-रूपी चन्द्रमा को धारण करते हैं । यदि नहीं डरते, तो क्यों धारण करते ? यह भाव है